पंचायती राज विभाग जेईएन,लेखाकारों की भी सीधी भर्ती की तैयारी
Posted On at by NREGA RAJASTHANकनिष्ठ लिपिकों की भर्ती जिला परिष्ादों के जरिए होगी और इसके लिए विज्ञप्ति जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। तकनीकी पदों पर संभवत: पहली बार बिना परीक्षा अंकों के आधार पर भर्ती होगी। इसके लिए राज्य स्तर पर मेरिट बनाई जाएगी। इसमें संविदा इंजीनियरों व अन्य कार्मिकों को बोनस अंक मिलेंगे।
पारदर्शिता पर सवाल
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सभी भर्तियों में पारदर्शिता बरती जाएगी, लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि इसमें गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। 1998 में जिला परिष्ादों के जरिए हुई तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती प्रकरण कोर्ट में अटक गया था।
ऎसे भर्ती करना भ्रष्टाचार को खुला निमंत्रण है। जब भर्ती के लिए पारदर्शी प्रक्रिया है तो उससे अलग हटकर भर्ती करने को कतई सही नहीं ठहराया जा सकता।
के.एल.कमल,पूर्व सदस्य, आरपीएससी
सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। भर्ती में गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है
सोहनलाल डारा,महामंत्री राजस्थान ग्राम सेवक संघ
पंचायत भर्ती में कम्प्यूटर कोर्स भी जरूरी
Posted On at by NREGA RAJASTHANपंचायतीराज भर्ती: ऊंची डिग्री पर नहीं मिलेंगे बोनस अंक
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मार्कशीट देखकर नौकरी देने को मंजूरी
Posted On at by NREGA RAJASTHANमंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद पंचायतीराज विभाग में भर्ती के लिए नियम बनाने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू होगी। नियमों में आयु सीमा, एससी, एसटी और महिलाओं के लिए पदों का आरक्षण, आयु सीमा में छूट, संविदा कर्मियों को बोनस अंक और चयन की प्रक्रिया आदि का खुलासा किया जाएगा। माना जा रहा है कि हर जिले में खाली पदों की भर्ती जिला परिषद स्तर पर ही होगी। चयन के लिए जिला स्तरीय कमेटियों को अधिकार देने की संभावना है।
विज्ञापन में आवेदन का खुलासा
भर्ती के जारी होने वाले विज्ञापन में आवेदन के तरीके का खुलासा होगा। माना जा रहा है कि शिक्षक भर्ती की तर्ज पर कनिष्ठ लिपिक और अन्य पदों के ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। अलग-अलग जिलों के लिए अलग आवेदन लेने की व्यवस्था की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि पंचायत समितियों में कनिष्ठ लिपिकों के 996 और पंचायतों में 18354 पद (हरेक में दो पद) पर भर्ती की जानी है।
मार्कशीट दिखाओ, नौकरी पाओ| पंचायतीराज में प्रस्तावित 22,790 भर्तियों में से कनिष्ठ लिपिकों के 19,515 पदों पर सीधी भर्ती की तैयारी है
Posted On at by NREGA RAJASTHANपंचायतीराज में 25,406 पदों पर होगी भर्ती
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पंचायतीराज में 25,406 पदों पर होगी भर्ती
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जिला एपीओ जेईएन लेखाकार क.लेखाकार सहा. प्रोग्रामर एलडीसी चतुर्थ श्रेणी कुल
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विशेष संवाददाता . जयपुर त्न पंचायतीराज विभाग में लिपिकों सहित छह पदों
पर प्रदेशभर में 25,406 भर्ती होना प्रस्तावित है। इससे पहले सरकार ने 23
हजार पदों के लिए भर्ती की घोषणा की थी, अब इसमें पहले से सृजित पदों को
शामिल कर दिया गया है। यह भर्ती जिलेवार करने पर विचार किया जा रहा है।
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| अजमेर 8 75 16 12 8 613 36 768 अलवर 14 109 28 23 14 1048 63 1299 बांसवाड़ा 8 95 14 14 8 678 36 853 बारां 7 49 14 10 7 482 29 598 बाड़मेर 8 127 16 16 8 822 40 1037 भरतपुर 9 84 18 18 9 810 45 993 भीलवाड़ा 11 88 22 18 11 849 65 1064 बीकानेर 6 73 11 10 6 486 27 619 बूंदी 5 42 9 9 5 402 22 494 चित्तौडग़ढ़ 11 65 22 13 11 658 46 826 चूरू 6 83 12 11 6 547 27 692 दौसा 5 52 10 10 5 491 24 597 धौलपुर 4 35 8 7 4 339 19 416 डूंगरपुर 5 73 10 10 5 519 25 647 गंगानगर 8 73 15 17 8 701 39 861 हनुमानगढ़ 7 68 10 15 7 556 30 693 जयपुर 13 118 26 22 13 1075 62 1329 जैसलमेर 3 52 6 6 3 282 15 361 जालौर 8 89 15 13 8 589 35 757 झालावाड़ 6 58 12 24 6 551 30 687 झुंझुनूं 8 96 16 15 8 637 38 818 जोधपुर 10 114 19 19 10 753 45 951 करौली 5 52 10 9 5 451 24 556 कोटा 5 36 10 8 5 352 22 438 नागौर 11 154 22 22 11 1006 52 1278 पाली 10 109 20 15 10 715 45 924 प्रतापगढ़ 5 48 10 6 5 344 21 439 राजसमंद 7 52 14 9 7 464 26 579 सीकर 8 109 16 16 8 720 38 915 सिरोही 5 39 10 7 5 342 21 429 टोंक 6 44 6 11 6 507 28 608 उदयपुर 12 143 21 23 12 1021 54 1286 कुल 249 2547 484 436 249 20,281 1160 25,406 |
Nrega महौरली 28.09.2012 को आयोजित की जावेगी जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है
Posted On at by NREGA RAJASTHANदिनांक 17.09.2012 को प्रदेश कमेटी का प्रतिनिधि मण्डल माननीय मुख्यमंञी महोदय से मिला इस दौरान समस्त नरेगा कार्मिकों के समायोजन के संदर्भ में राज्य सरकार को पूर्व में प्रेषित विधिक राय के सम्बंध में चर्चा की गई इस सम्बंध में माननीय मुख्यमंञी महोदय द्वारा राय का विधिक परीक्षण के पश्चात निर्णय किये जाने की बात की वार्ता के पश्चात प्रदेश कमेटी द्वारा निर्णय लिया गया कि यदि राज्य सरकार द्वारा उक्त विधिक राय के बाद भी नकारात्मक कदम उठाया जाता है तो इस पूर्ण रूप से विरोध आंदोलन तथा न्यायालय की शरण दोनों तरह से किया जावेगा साथ ही साथियो पूर्व में निर्धारित दिनांक 24.08.2012 को आयोजित की जाने वाली महौरली प्रशासनिक स्वीक़ति नहीं मिलने के कारण अब दिनांक 28.09.2012को आयोजित की जावेगी जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है साथियो आप सब से अनुरोध है कि हम कार्मिकों के समायोजन की लडाई अब अंतिम दौर में जिसके लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाये जाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है फिर भी यदिराज्य सरकार नकारात्मक रूख अपनाती है तो हम कार्मिकों को आंदोलन के साथ साथ न्यायालय की शरण भी लेनी होगी जिसके लिए समस्त कार्मिक ब्लॉक एवं जिला स्तर पर हर तरह से साम, दाम, दण्ड एवं भेद नीति का अनुसरण करते हुए हर समय तैयार रहें साथियो आंदोलन का बिगुल कभी भी बजाया जा सकता है जिसके लिए आप से अनुरोध है कि पूर्व की भांति धैर्य व साहस का परिचय देते हुए तैयार रहें साथियो यह समस्त कार्मिकों को विदित है कि न्यायालय की शरण जाने की स्थिति में समस्त कार्मिकों का आर्थिक स्तर मजबूत होना चाहिए जिसके लिए समस्त कार्मिक अपने पंचायत समिति एवं जिला स्तर पर आवश्यकतानुसार फण्ड इकठठा कर अपने पास रखें ताकि वक्त जरूरत काम आवे साथ ही अपने ब्लॉक अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष के सम्पर्क में रहें
क श्ती भी ना बदली, दरिया भी ना बदला
हम बदलने वालों का जज्बा भी ना बदला
किया शोक-ए-सफर, ऐसा हमने कि
मंजिल भी ना पाई पर रास्ता भी ना बदला
Source- http://nregakcrisangh.hpage.com/छिने अधिकार लेने में ही रह गए सरपंच!
Posted On at by NREGA RAJASTHANमहानरेगा में लाखों की लागत से आईटी सेंटर स्वीकृ किए गए लेकिन एक का भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया। गांवों की सरकारें पहले अपने स्तर पर ही टेंडर कर गांव का चहुंमुखी विकास कराती थीं। टेंडर करने का यह सिलसिला लंबे समय से ही चला आ रहा था। ग्राम पंचायत की योजनाओं के साथ-साथ महानरेगा के टेंडर भी सरपंच व ग्रामसेवक ही किया करते थे। ग्राम स्तर पर टेंडर करने से गांव के ठेकेदारों को भी रोजगार मिलता था। इधर, सरकार ने महानरेगा में भ्रष्टाचार की आड़ लेते हुए ग्राम पंचायतों से महानरेगा के टेंडर तो ग्राम पंचायतों से छीने ही, पंचायत की योजनाओं के लिए किए जाने वाले टेंडर भी छीनकर पंचायत समिति को दे दिए।
पंचायत समिति ने लंबी मशक्कत के बाद अपने स्तर पर ही टेंडर किए तो अलग-अलग सामग्री के अलग-अलग ठेकेदार हो जाने के कारण सामग्री ही समय पर सप्लाई नहीं कर पाए। आईटी सेंटर पर ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री सप्लाई करने की भी सरपंचों ने शिकायतें ही लेकिन प्रशासन ने जांच करवाना मुनासिब ही नहीं समझा। सरपंचों ने अपने अधिकारी छीनने का जमकर विरोध किया, नतीजतन सरकार को झुकना पड़ा और 2 अक्टूबर को ग्राम पंचायतों को ही टेंडर करने के लिए स्वतंत्र कर दिया। लेकिन राज्य सरकार की विरोधाभासी व्यवस्था के कारण ग्राम पंचायतों द्वारा टेंडर करने के बाद भी वे अमल में नहीं आ पाए।
इसके पीछे वजह यह रही कि पंचायत समिति स्तर पर किए गए टेंडरों को निरस्त ही नहीं किया गया और ना ही ठेकेदारों को उनकी जमा राशि ही लौटाई। ऐसे में वर्तमान में दो-दो स्तर पर टेंडर प्रक्रिया हो गई और इन दोनों में से कम दर वाली फर्म से सामग्री खरीद नहीं करने पर वसूली का डर सताने लगा। इसकी वजह से सरपंचों ने सामग्री की खरीद ही नहीं कर पाई। टीएफसी व एसएफसी समेत अन्य योजनाओं में ग्राम पंचायत अपने स्तर पर काम करवाती है लेकिन पहले टेंडर का रोड़ा और बाद में टीएफसी की किश्त का उपयोग केवल हैंडपंप व बोरिंग करवाने में ही करने के लिए पाबंद करने के कारण वे अन्य कोई काम नहीं करवा पाए।
इसमें भी पीसांगन पंचायत समिति समेत कुछ अन्य स्थानों को डार्कजोन घोषित कर दिया गया। महानरेगा में भी केवल आईटी सेंटर के ही पक्के काम स्वीकृत किए गए। जिले में पिछले साल मार्च माह में 256 ग्राम पंचायतों में दस-दस लाख की लागत से आईटी सेंटर के काम स्वीकृत किए गए लेकिन दस माह बीत जाने के बावजूद टेंडरों के घालमेल में वह आधे-अधूरे ही पड़े हैं। अब ग्राम पंचायतों द्वारा किए गए टेंडर कब से अमल में आ पाएंगे, यह भी तय नहीं है। इन टेंडरों के लिए सरकार ने सरपंच व ग्रामसेवक पर विश्वास ना कर पूरी कमेटी बनाते हुए जेईएन व एकाउंटेंट को भी शामिल किया गया।
महानरेगा में गड़बड़ी के चलते मालातों की बेर के सरपंच गणपतसिंह व बोराड़ा के सरपंच रामसिंह चौधरी को जेल की हवा खानी पड़ी, वहीं जवाजा पंचायत समितियों में सरपंचों के नाम रिकवरी निकाली गई। गड़बड़ी के कारण ही महानरेगा में सरपंचों से मेट लगाने और श्रमिकों के नाम लिखने का अधिकार भी ग्राम पंचायतों से छीनकर पंचायत समिति स्तर पर दे दिया गया। यही वजह रही कि सरपंच अपने विश्वासपात्र को मेट तक नहीं बना पाए और विरोधी उन पर हावी रहे।
सरपंचों का एक साल यूं ही बरबाद हो गया। क्षेत्र का विकास नहीं कर पाए। पूरे साल टेंडरों को लेकर ही माथापच्ची करते रहे। अभी भी पंचायतों ने टेंडर कर लिए लेकिन वह अमल में नहीं आ पाए। पुराने टेंडर भी निरस्त नहीं हो पाए। - भूपेंद्र सिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष सरपंच संघ
पंचायत क्षेत्र में कोई विकास नहीं करवा पाए। यहां तक की नालियों का निर्माण तक नहीं करा पाए। विकास नहीं होने से जनता सरपंचों को कोस रही है। आईटी सेंटर दिए तो राशि दी सिर्फ 4 लाख। अब कह रहे हैं पहले इसका हिसाब तो दो आगे की राशि देंगे, ऐसे में विकास तो ठप होगा ही, जाहिर है काम भी रुकेगा। - श्रीकिशन गुर्जर, सरपंच, न्यारा
महानरेगा : निजी कृषि भूमि पर भी होंगे काम
Posted On at by NREGA RAJASTHANमहानरेगा : निजी कृषि भूमि पर भी होंगे काम
गुड़गांव, : हरियाणा सरकार के ग्रामीण विकास, पर्यावरण व पंचायत विभागों के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव पी. राघवेंद्र राव ने शुक्रवार को गुड़गांव मंडल के उपायुक्तों को बताया महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अब निजी कृषि भूमि पर भी कार्य करवाए जा सकते है लेकिन वह कार्य ग्रामसभा, ग्राम पंचायत तथा जिला परिषद से अनुमोदित हो और उनकी प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति लेने के बाद ही कराए जा सकेंगे। मनरेगा के क्रियांवयन की समीक्षा कतरे हुए उन्होंने बताया मनरेगा के तहत मोटे तौर पर कौन से कार्य निजी कृषि भूमि पर करवाए जा सकते है उनकी सूची तैयार की जा रही है। एक व्यक्ति की निजी कृषि भूमि पर अधिकतम 1,50,000 रुपये से पूरे होने वाले कार्य ही करवाए जा सकते है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने गांव या आस-पास के क्षेत्र में साल में 100 दिन का रोजगार मुहैया करवाया जाता है। योजना के अन्तर्गत हरियाणा में दैनिक पारीश्रमिक में संशोधन करके 179 रुपये किया गया है जो पहले 141 रुपये था।
उन्होंने उपायुक्तों से कहा वह इस योजना को लोगों में ज्यादा से ज्यादा प्रचारित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में शिविर लगवाएं। वित्तायुक्त ने कहा जिला स्तर पर विभिन्न विभागों जैसे लोक निर्माण, मार्केटिंग बोर्ड, हुडा, एचएसआईआईडीसी, बिजली निगम, सिंचाई, वन, जनस्वास्थ्य आदि द्वारा करवाये जाने वाले कार्यो में भी मानव श्रम से होने वाले कार्यो का अलग ब्योरा तैयार करवा कर उन्हे मनरेगा के तहत करवाएं। इसके लिए वे भी इन विभागों के प्रधान सचिवों के साथ चंडीगढ़ में विचार-विमर्श करेगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन विभागों के अधिकारी उपायुक्त से अनापत्ति लेकर ही अपने विभागीय विकास कार्यो को मूर्तरूप देंगे। उन्होंने बताया इस योजना के तहत राजीव गांधी सेवा केंद्रों का निर्माण करवाया जा सकता है। पी. राघवेंद्र राव ने गुड़गांव मंडल के जिलों में ब्लाक व ग्राम पंचायत स्तर पर इन केंद्रों के निर्माण के बारे में रिपोर्ट तलब की।
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by- dainikbhaskar.com
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